Thursday, 20 July 2017

स्टीफन हाकिंग दुनिया के महान और अद्भूत वैज्ञानिक

मूझे मौत से कोई डर नहीं लगता लेकिन मूझे मरने की भी कोई जल्दी नहीं है। क्योंकि मरने से पहले जिंदगी में बहूंत कूछ करना बांकि है। ऐसा कहना है महान और अद्भूत वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग का जिसका शरीर का कोई भी अंग काम नहीं करता वो चल नहीं सकते बोल नहीं सकते वो कूछ कर नहीं सकते लेकिन फिर भी जीना चाहते हैं। स्टीफन का कहना है कि मृत्यु तो निष्चित  है लेकिन जन्म और मृत्यु के बीच कैसा जीना चाहते है। वह हम पर निर्भर करता है। चाहे जिन्दगी जितनी भी कठिन हो लेकिन आप हमेशा कुछ न कुछ कर सकते हैं और सफल हो सकते हैं स्टीफन का जन्म 8 जनवरी 1942 में इंग्लैण्ड के आक्सफोर्ड शहर में हूआ था। जब स्टीफन हाकिंग का जन्म हूआ उस समय द्वितीय विष्व युद्ध चल रहा था। स्टीफन के माता पिता लंदन के हायगेट सिटी में रहते थे। जहां पर अक्सर बमबारी हूआ करती थी। जिसकी वजह से वह अपने पुत्र के जन्म के लिए आक्सफोर्ड चले आये। जहां पर सुरक्षित रुप से स्टीफन हाकिंग का जन्म हो सका बचपन से ही स्टीफन हाकिंग बहूंत इंटैलिजेंट थे। उनके पिता डॉक्टर और मां हाउस वाईफ थी। स्टीफन का बूद्धि का परिचय इसी बात से लगाया जा सकता है।



कि बचपन में लोग उन्हें आईस्टिन कह कर पुकारते थे। उन्हें गणित में बहूंत दिलचस्पी थी। यहां तक की  उन्होने पुराने इलेक्ट्रानिक्स उपकरणों से कम्प्यूटर बना दिया था। 17 वर्श की उम्र में उन्होने आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रवेश ले लिया आॅक्सफोर्ड में पढ़ाई के दौरान उन्हें अपने दैनिक कार्यों को करने थोड़ी दिक्कत आनें लगी थी। एक बार स्टिफन छुट्टियाँ मनाने के लिए अपने घर पर आए थे तभी वह सिढ़ियों से उतरते समय बेहोंस हो गए और निचे गिर गये  शुरु में सभी ने कमजोरी मात्र मानकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन बार-बार इसी तरह बहुत से अलग-अलग प्राबलमस होने के बाद जांच करवाया तो पता चला कि उन्हें कभी भी न ठीक होने वाली बीमारी है। जिसका नाम यूरान मोटार डीसीस था। इस बिमारी में मासपेसिंयो को निरंतरीत करने वाली सारी नसें धिरे-धिरे काम करना बंद कर देती है। जिससे षरीर अपंग हो जाता है और पूरे अंग काम करना बंद कर देते हैं। ड़ाॅ. का कहना था कि स्टीफन अब दो वर्श तक और जी सकते हैं। क्योंकि अगले दो वर्शों में उनका शरीर धिरें-धिरे पूरा काम करना बंद कर देगी।



स्टीफन को भी इस बात का बड़ा सदमा लगा लेकिन उन्होने कहा कि मैं ऐसे नहीं मर सकता मूझे जीवन में अभी बहूंत कूछ करना बांकि है। स्टीफन अपनी बीमारी को दरकिनार कर तुरन्त अपने वैज्ञानिक जीवन का सफर शुरु किया और अपने आप को पूरी तरह विज्ञान को समर्पित कर दिया। धिरे-धिरे उनकी ख्यात पूरी दूनिया में फैलने लगी उन्होने अपनी बीमारी को वरदान के रुप में समझ लिया था। लेकिन वहीं दूसरी तरफ उनका शरीर भी उनका साथ छोड़ता चला जा रहा था। धिरे-धिरे उनका बांया हिस्सा पूरा काम करना बंद कर दिया बीमारी बढ़ने पर उन्हें बील चेयर का सहारा लेना पड़ा।


उनकी ये चेयर एक कम्प्यूटर के साथ बनी है। जो उनकी सर उनकी आंखों से पता लगा लेती है कि वह क्या बोलना चाह रहे हैं। धिरे-धिरे स्टीफन का पूरा शरीर काम करना बंद कर दिया था। लेकिन उस बीमारी में एक पलस पाइंट भी था कि स्टीफन सिर्फ शारिरीक रुप से अपंग हो रहे थे। ना कि मांसिक रुप से उसके बाद लोग यूं ही देखते चले गए और हाकिंगस मौत को मात पे मात दे रहे थे। उन्होने ब्लैक होल का कान्सेपट और हाकिंगस रेडिऐषन का महान विचार दूनिया को दिया उन्होने अपने विचारों को और सरल भाषा में समझाने के लिए एक किताब लिखी ।ABRIFE HISTORY OF TIME  जिसने दूनिया भर के विज्ञान जगत में तहलका मचा दिया। दोस्तों स्टीफन हाकिंग एक ऐसा नाम है जिन्होने शारिरीक रुप से विक्लांग हाने के बाउजूद अपने आत्म विष्वास के बल पर विष्व का सबसे अनूठा वैज्ञानिक बन कर दिखाया है। जो न केवल विष्व में अद्भूत न कि सामान्य  लोगों के लिए प्रेरणा बने हैं।          

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