कोई भी सोंच एक बड़ी सोंच के बिना नहीं कि जा सकती ऐसा कहना है दूनिया को गुरुत्वाकर्शण का सिद्धांत देने वाले महान वैज्ञानिक (Isaac
Newtan) आईजेक न्यूटन का जिन्होने अपनी सोंच केे दम पर इस विश्व को एक ऐसे वैज्ञानिक सिद्धांत दिए जिसके बिना हम विज्ञान के बारे में सोंच भी नहीं सकते हैं।
न्यूटन के जीवन के बारे में बताने से पहले में अपको उसकी कूछ खोज के बारे में बता देता हँू। न्यूटन ने (Low of Gravity) यानि गुरुत्वाकर्शण बल की खोज की थी। उन्होने बताया की गुरुत्वाकर्शण बल नाम की एक शक्ति है जो हर चीज को अपनी तरफ खिंचती है.
और इसी बल की वजह से चन्द्रमा पृथ्वी की चक्कर लगाता है और पृथ्वी सूर्य का इसके अलावा न्यूटन के गतिकीय तीन नियम यानि Low of Motison फिजिक्स में सबसे ज्यादा प्रयोग किये जाते हैं। इन नियमों को एक सायकल से लेकर हवाई जहाज बनाने तक फालो किया जाता है।
इसके आलावा भी उन्होने बहुत सारे खोज किए लेकिन आज हम उनके खोज के बारे मे नहीं बल्की उनकी खोज के बारे में जानेगे तो चलिए षुरु करतें हैं। सर आईजेक न्यूटन का जन्म 25 दिसम्बर 1642 को एक बहँूत ही गरीब परिवार में हूआ था।

उन्हें पिता का प्यार नहीं मिल सका क्यों कि उन्के पिता की मृत्यु उनके इस दूनिया में आने से करीब 3 महिने पहले हो चूकी थी। न्यूटन के जन्म से ही बहँूत ही कमजोर पैदा हूए थे और उन्हें बचा पाना लगभग नामूमकिन सा था। लेकिन षायद उपर वाले ने न्यूटन को महान कार्यों को लिए जीवित रखा और बहँूत मूस्किलों के बाद उनकी जान बचाई जा सकी थी।
न्यूटन के जीवन के बारे में बताने से पहले में अपको उसकी कूछ खोज के बारे में बता देता हँू। न्यूटन ने (Low of Gravity) यानि गुरुत्वाकर्शण बल की खोज की थी। उन्होने बताया की गुरुत्वाकर्शण बल नाम की एक शक्ति है जो हर चीज को अपनी तरफ खिंचती है.
और इसी बल की वजह से चन्द्रमा पृथ्वी की चक्कर लगाता है और पृथ्वी सूर्य का इसके अलावा न्यूटन के गतिकीय तीन नियम यानि Low of Motison फिजिक्स में सबसे ज्यादा प्रयोग किये जाते हैं। इन नियमों को एक सायकल से लेकर हवाई जहाज बनाने तक फालो किया जाता है।

उन्हें पिता का प्यार नहीं मिल सका क्यों कि उन्के पिता की मृत्यु उनके इस दूनिया में आने से करीब 3 महिने पहले हो चूकी थी। न्यूटन के जन्म से ही बहँूत ही कमजोर पैदा हूए थे और उन्हें बचा पाना लगभग नामूमकिन सा था। लेकिन षायद उपर वाले ने न्यूटन को महान कार्यों को लिए जीवित रखा और बहँूत मूस्किलों के बाद उनकी जान बचाई जा सकी थी।
आइजेक का नाम उनके स्र्वगवासी पिता के ही नाम पर रखा गया था। जब न्यूटन 3 साल के थे तो उनकी माँ ने दूबारा षादी कर ली लेकिन न्यूटन के षौंतेले पिता को वह बिलकूल भी पसंद नहीं थे। इस लिए उनके माँ ने उन्हें उनके दादा दादी के पास छोंड दिया और वह अपने दूसरे पति के साथ रहने लगी षुरवाती दिनों में न्यूटन ठीक से बोल भी नहीं पाते थे.
और साथ ही साथ जिददी और गूस्सैल स्वभाव के थे। इसलिए उनके कोई दोस्त नहीं हूआ करते थे और लोग उन्हें पागल भी बोलते थे। वे षूरु से ही चाँद तारे के बारे में सोंचते रहते और अपने दादा दादी से उसके रिलेटिव कूवेष्चन किया करते थे।
लेकिन उनके दादा दादी उनके सवाल का ठीक से जवाब नहीं दे पाते थे। क्योकि उस समय तक विज्ञान में बहँूत ही कम खोज हो पाया था। 12 साल के उम्र में उन्होने स्कूल जाना षूरु किया। उनकी षूरु की पढ़ाई The King*s School Grantham में हूई।
और साथ ही साथ जिददी और गूस्सैल स्वभाव के थे। इसलिए उनके कोई दोस्त नहीं हूआ करते थे और लोग उन्हें पागल भी बोलते थे। वे षूरु से ही चाँद तारे के बारे में सोंचते रहते और अपने दादा दादी से उसके रिलेटिव कूवेष्चन किया करते थे।
लेकिन उनके दादा दादी उनके सवाल का ठीक से जवाब नहीं दे पाते थे। क्योकि उस समय तक विज्ञान में बहँूत ही कम खोज हो पाया था। 12 साल के उम्र में उन्होने स्कूल जाना षूरु किया। उनकी षूरु की पढ़ाई The King*s School Grantham में हूई।
वह पढ़ने में बिल्कूल भी अच्छे नहीं हूआ करते थे और उनके पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से स्कूल में बच्चे उनका मजाक उड़ाते इस बात की वजह से उनका क्लासमेट के साथ झगड़ा होता रहता था यहाँ तक की उनके झगड़े की वजह से उन्हें स्कूल से भी निकाल दिया गया। इसी बीच उनके दूसरे पिता की भी मृत्यु हो गई और फिर से न्यूटन अपनी माँ के पास आ गए। अब उनके घर में इंकम का कोई भी स्त्रोत नहीं बचा था। और खर्चे चलाना भी बहँूत ही मूस्किल हो रहा था। इसीलिए न्यूटन की माँ चाहती थी की अब न्यूटन खेती कर ले और अपनी घर संभाले लेकिन न्यूटन का मन खेती में बिल्कूल भी नहीं लगता था।
इसीलिए स्कूल दकमे प्रिंसिपल से बात करके न्यूटन की माँ ने उन्हें फिर से स्कूल भेजना षुरु कर दिया। लेकिन इस बार न्यूटन ने उस स्टूड़ेंट से बदला लेने की सोंच ली जिसकी वजह से वह स्कूल से निकाले गये थे और पूरी सिद्दत के साथ पढ़ाई करने लगे औ जल्द ही पूरी स्कूल के टापर्स में गिने जाने लगे और उसके बाद 1661 में अपने एक अंकल के माध्यम से न्यूटन को Trinity
Coollege Combridge में ऐडमिषन मिल गया। वहाँ वह अपनी फिस भरने और खूद के खर्चों को चलाने के लिए काॅलेज के अमीर स्टूडेंटस के यहाँ काम करते थे।
इसी बीच 1664 में उन्हें अपने काॅलेज से स्काॅलरसिप भी मिली किसकी वजह से वह अपनी पढ़ाई और रिष्र्च पर ज्यादा ध्यान दे सकते थे। और फिर काॅलेज में ही 1665 में कूछ मैथेमैटिकल्स Low का खोज किया जिसके बाद में बंसबनसने नाम दिया। 1665 में ही उन्हाने बीए की भी पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए ऐमे में एड़मिषन की सोंची लेकिन एड़मिषन के समय में ही अचानक लंदन में फ्लैग की बीमारी फैल गई जिससे षहर को कूछ महीनो के लिए बंद कर दिया गया था और इसीलिए वह अपनी माँ के पास वापस आ गए और घर पर ही अगले 2 सालों तक Lwo
of Motion और Low
of Gravity के अपने सिद्धांतो पर काम करना षुरु कर किया। देखते ही देखते अगले कूछ सालों में कड़ी मेंहनत के बाद उन्होंने सफलता पा ली और दूनिया को दिखा दिया जिद्दी, गूस्सैल और पागल लड़का अगर चाह ले न तो कूछ भी कर सकता है।
अपने सिद्धांतो से दूनिया को बदलने के बाद 20 मार्च 1727 को लंदन षहर में न्यूटन की मृत्यु हो गई। दोस्तों आईजेक न्यूटन के महान सिद्धांतों की वजह से आज नए खोज संभव हो पाते हैं। आज के वैज्ञानिक भी न्यूटन के खोज को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं और उन्हीं के सिद्धांतो पर काम करते हैं। दोस्तों मनुश्य अपने विचारों से बना होता है। वह जैसा सोंचता है वह वैसा ही बन जाता है। अपनी सोंच हमेषा पाजिटिव रखिए क्यिोंकि दूनिया में कूछ भी असंभव नहीं है।
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