Thursday, 20 July 2017

भारत की बहादूर बेटी- कल्पना चावला

दोस्तों इस दूनिया में जन्में हूए सभी लोगों को एक न एक दिन इस खूबसूरत जहाँ को छोड़कर जाना होता है। मगर दूनिया में कूछ लोग सिर्फ जिने के लिए आते हैं। मौत तो महज सिर्फ उनकी षरीर को खत्म करती है। मैं बात करने जा रहा हँू भारत की बहादूर बेटी कल्पना चावला की। भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेषटल दूरधटना ग्रस्त के साथ कल्पना की उड़ान रुक गई लेकिन दूनिया के लिए वह आज भी एक मिषाल है। दोस्तों सोंच कों कोई नहीं रोक सकता सोंच हमेषा उड़ान भरती आई है और भरती रहेगी। अंत्रिक्ष की परी कहे जाने वाली कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हूआ था।




कल्पना अंतरिक्ष में जापे वाली पहली भारतीय थी। उनकी पिता का नाम बनारषी लाल और माता का नाम संज्योति है। बचपन में सभी लोग उन्हें मोटू कह कर पूकारते थे। दोस्तों कल्पना नाम के अनूरुप ही बचपन से ही वे कल्पना भरी सोंच रखती थी। वो हमेषा आकाष और उसकी ऊँचाइयों के बारे में सोंचती रहती। अपने पापा से विमान और चाँद तारों के बारे में बात किया करती थी। कल्पना की प्रारंभिक पढ़ाई करनाल के टाइगोर स्कूल में हूई थी। फिर कस्कूल में हूई थी। फिर कल्पना ने 1982 में चंड़ीगढ़ इंजिनियरिंग काॅलेज से ऐड़ोनाटिकल इंजिनियरिंग की की ड़िग्री ली उसके बाद अपने ख्वाबों को पूरा करने अमेरीका चली गई जहाँ उन्होने कोलूराटो इनिवरसिटी से पीएचड़ी की उपाधी प्राप्त की कल्पना को 1988 में नाषा में षामिल कर लिया गया। जहाँ रह कर उन्होने बहूँत सारे रिषर्च किए।





उनकी लगन और मेहनत को देखते हूए बाद में चलकर अंतरिक्ष मिषन की टाप 15 की टीम में षामिल कर लिया गया और देखते ही देखते उन 6 लोगों की टीम में उनका नाम आ गया जिन्हें अंतरिक्ष में भेजा जाना था। और अब इसी तरह कल्पना की सपनो को पंख लग चूके थे। उनका एक अंतरिक्ष मिषन 19 Novmbar  1997 को 6 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतरिक्ष स्पेसटल कोलंबिया कि उड़ान STST87 से षुरु हूआ। कल्पना चावला अंतरिक्ष मे उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला थी। यह मिषन सफलता पूर्वक 5 दिसम्बर 1997 को समाप्त हूआ उस मिषन के बाद भारत के टाइलेंट को पूरे विष्व में पहचाना जाने लगा जिस समय भारत के लागों को अंतरिक्ष की समझ भी नहीं थी।




उस समय भारत की बेटी कल्पना चावला ने अंतरिक्ष में जाकर पूरे विष्व में भारत का परचम लहरायी थी। सभी ने उनके जज्बे को सलाम किया और 5 साल के बाद पुनः नाषा ने उन्हें अंतरिक्ष में जाने के लिए चुना। कल्पना चावला की दूसरी उड़ान 16 जनवरी 2003 को कोलंबिया स्पेसटल से ही आरंभ हूई यह 16 दिन का मिषन था। इस मिषन में उन्होने अपने सहयोगी के साथ मिलकर लगभग 80 परिक्षण और प्रयोग किए लेकिन फिर वह हूआ जिसे सोंचकर आँखें भर आती है। हाथों में फूल लिए हूए स्वागत के लिए खड़े वैज्ञानिक और अंतरिक्ष प्रेमी सहित पूरा विष्व उस नजारे को देखकर षोक में डूब गया।





धरती पर उतरने से सिर्फ 16 मिनट ही रह गए थे। कि अचानक सटल बलास्ट हो गया और कल्पना के साथ ही साथ सभी अंतरिक्ष यात्री मारे गए। दोस्तों कल्पना भले ही उस दूर्धटना की षिकार हूई हो लेकिन वो आज भी वो हमारे दिलों में जिन्दा हैं। वो आज पूरे विष्व के लोगों के लिए आदर्ष हैं। दोस्तों मैं पुनः वहीं बात दोहराना चाहता हूँ कि कुछ लोग दूनिया में सिर्फ जिने के लिए आते हैं। मौत तो महज उनके षरीर को खत्म करती है।



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