Thursday, 20 July 2017

Sandeep Das biography in hindi - | तबले का जादूगर - संदीप दास, ग्रैमी अवार्ड विजेता |


छह सालकी उम्र में ही संदीप दास खिलौने के बजाय टबले के मांग करते थे। एक बार स्कूल के एक टीचर ने उनके पिता से सिकायत की थी की वह पढ़ाई के दौरान मेज पर उंगली थिरकाते रिहते हैं। यहीं वो निषानियां थी, जिनसे तय हो गया की संदीप दास एक प्रसिद्ध तबला वादक बनने वाले हैं। उन्हें 59वें ग्रैमी अवाड्र्स से सम्मानित किया गया। उन्को सिल्क रोड़ एन्सेंबल ग्रप के साथ बेस्ट ग्लोबल म्यूजिक के लिए ग्रैमी अवार्ड दिया गया।वह 9 साल के उम्र में तबला गुरू पंडित किषन महराज के पास बनारस पहुंच गये।

                                                               संगीत के कारण मिला गोल्ड मेडल


संदीप का जन्म 23 जनवरी, 1971 को पटना में हुआ। उनका परिवार मुल रूप से पष्चिम बंगाल से था। संदीप ने अपनी स्कूलिंग सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, पटना से की। उन्होनें बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से इंग्लिष लिटरेचर में गोल्ड मेडल के साथ ग्रेजुएषन पूरी की। वह कहते हैं कि अगर संगीत से जुडे हैं तो आपकी मेमोरी अच्छी हो जाती है। 

        परिवार की वजह से मिली सफलता


संदीप के पिता जी उनको तबला सिखाने के लिए परिवार के साथ बनारस सिफ्ट हो गए। वर्श 1990 में संदीप प्रोफेषनल तबला वादक बनने के लिए दिल्ली पहंुचे। वह कहते हैं की मैं जो कुछ भी हुं, परिवार के वजह से हुं। परिवार ने मुझे अपने षौक पर गंभीरता से विचार करने का मौका दिया। हम मध्यमवर्गीय परिवार से थे, पर फिर भी षौक पूरा करने का मौका दिया।

          

               हमारा फोकस हुनर पे हो 


वर्श 2000 में चीनी मूल के अमरीकी संगीतकार यो यो मा के साथ हुई मुलाकात ने संदीप की दूनिया बदलकर रख दी। वह यो यो मा के साथ मिलकर परफाॅर्मेंस देते हैं। 2003 और 2009 में संदीप का नामांकन ग्रैमी अवार्ड के लिए हुआ था, पर उन्हें अवार्ड नहीं मिला वह कहते हैं कि भारत के लोग सिर्फ पढ़ाई की तरफ ध्यान देते हैं, जबकि हुनर पर फोकस होना चाहिए।  
  

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