Thursday, 20 July 2017

कार को दुनिया में पहले लाने वाले- हैनरी फोर्ड, कहते है की...

जब सब कूछ आपके खिलाफ जा रहा हो तो याद रखिए हवाई जहाज हवा के विरूद्ध उड़ान भरता है उसके साथ नहीं। ऐसा कहना है हैनरी फोर्ड़ का जिन्हें आधुनिक कारों का जनक कहा जाता है। हैनरी ने कार को दूनिया भर में इतना लोकप्रिय और सस्ता बना दिया जिसे एक आम आदमी आसानी से खरीद सकता है और उसका लाभ उठा सकता है। लेकिन ऐसा कर दिखाना तो इतना आसान तो बिल्कूल भी नहीं था। आइए हम षुरू से स्टार्ट करते हैं। हैनरी फोर्ड का जन्म 30 जूलाई 1863 को अमेरीका के ग्रीन फील्ड नाम के जगह पर हूआ था। हैनरी बहँूत ही गरीब घर में पैदा हूए थे। उनके पिता विलियम फोर्ड एक बहँूत ही साधारण से किसान थे। बचपन में हैनरी का खिलौना अन्य छोटे बच्चों से अलग हूआ करता था। उन्हें खिलौने से ज्यादा लोहे के औजारों से खेलना पसंद था।


5 वर्श की आयु में हैनरी का एडमिषन गाँव केे पास के एक स्कूल में ही कराया गया था। जहाँ उन्होने अपनी षुरू की पढ़ाई की और फिर पैसे न होने की वजह से आगे की पढ़ाई न कर सके इसीलिए उनके पिता चाहते थे कि हैनरी एक अच्छा किसान बने। लेकिन हैनरी को खेतों में काम करना बिल्कूल भी पसंद नहीं था। हैनरी फोर्ड बिना धोड़ो के चलने वाली गाड़ी बनाना चाहते थे और उसके लिए रात-रात भर जग कर वो ऐक्सपेरिमेंट किया करते थे। दरअसल उस समय गाड़ियाँ तो बननी षुरू हो गई थी। लेकिन वह इतनी महंगी हूआ करती थी की अमीर पैसे वाले लोगों को उसे खरीदने के लिए बहँूत सोंचना पड़ता था और बात की जाए आम आदमी की तो वो उनके लिए एक सपना सा था।


उन्हें गाड़ी के ऐक्सपेरिमेंट के लिए पैसे की जरूरत पड़ने लगी और इसी लिए वह 16 वर्श की उम्र में घर छोंड़कर डेटट्राईट में उन्होने स्ट्रीम इंजन की एक कंपनी में काम किया वो कहते थे कि उन्हें इस काम को करने बहँूत मजा आता था। क्योंकि यह भी औजारों से संबंधित ही काम था। कूछ सालों तक उस कंपनी में काम करने के बाद वह वहाँ के सिनियर इंजिनियर बन गए जिससे उन्हें अच्छी सैलरी भी मिलने लगी लेकिन पूरी सैलरी कार के ऐक्सपेरीमेंट में खतम हो जाती थी। इसीलिए वो और पैसों के लिए पार्ट टाईम जाब भी किया करते थे। हैनरी फोर्ड़ एक आम आदमी से दोगुना काम किया करते थे। आखिरकार उनका मेहनत रंग लाया और बहँूत सारा ऐक्सपेरिमेंट के बाद 1896 में उन्हाने अपनी पहेली कार बनाई।



 जब कार इंजन स्टार्ट हूई उस समय लगभग रात के तीन बज रहे थे और बारिस भी खूब हो रही थी। लेकिन ऐक्साईटमेंट इतना ज्यादा था कि उन्होने उसी बारिस में अपनी कार निकाली और घर के बाहर चलाने लगे। लोग जोर-जोर से आवाज सुनकर बाहर आ गए और उस कार को देखकर आष्चर्य करने लगे उसके बाद हैनरी का मनोबल बढ़ाया। कूछ दिनो के बााद हैनरी ने वह गाड़ी बेंच दी और इससे मिलने वाले पैसे और कूछ और पैसे अपने पास से मिलाकर उन्होने 1899 में एक कंपनी जिसका नाम डिट्रायट आटोमोबाईल था।



 इस कंपनी ने 25 कारें भी बनाकर बेंची लेकिन पैसे की कमी हाने के कारण उस कंपनी को बंद करना पड़ा। हार न मानते हूए 30 नवम्बर 1901 में उन्होने अपने कूछ अमीर दोस्तों के साथ मिलकर फिर से एक और कम्पनी खोली जिसका नाम हैनरी फोर्ड़ था लेकिन दोस्तो से मतभेद होने के कारण उन्हें भी बंद करना पड़ा। उनके दोस्त चाहते थे कि कार को महंगा बेचा जाए और केवल अमीर लोगों को ही टारगेट किया जाए। लेकिन हैनरी की सोंच षुरू से ही अलग थी और दोनो के विचार न मिलने के कारण उस कम्पनी को बंद करना पढ़ा था। उसके बाद सभी पुराने बातों से सीख लेते हूए हैनरी फोर्ड़ ने 16 जून 1903 को एक और कम्पनी खोली जिसका नाम फोर्ड़ था। फोर्ड़ कम्पनी को दुनिया के सामने लाने के लिए उन्होने अपनी एक कार को रेसिंग ट्रैक पर उतारी जिसका माड़ल फोर्ड़ 999 था। इस कार ने मानो धूम ही मचा दिया था।



यह कार उस रेस में फस्ट आई जिसके कारण हैनरी फोर्ड और उनकी कम्पनी को लोग जानने लगे। 1909 में उनकी कम्पनी एक टी माडल कार बनायी जोकि बहँूत प्रसिद्ध हूई। उसके बाद मानो पैसों की बारीस ही हो गयी और देखते ही देखते फोर्ड ने हजारो लाखों कारों कि बिक्री करनी षुरू कर दी। उनकी सफलता का एक राज यह भी था कि उनका हर कारीगर किसी एक काम का प्रोफेषनल था और वह एक ही काम करता था जिसमें उसको महारत हांसिल है। सस्ती कारो से हमारी लाईफ स्टाईल बदलने के बाद आखिरकार 7 अप्रेल 1947 को हैनरी फोर्ड ने इस दूनिया को अलविदा कह दिया। दोस्तों हैनरी फोर्ड का मानना है कि बाधाएँ वो डरावनी चिजें हैं जिसे आप तब देखते हैं जब आप लक्ष्य से अपनी नजरें हटा लेते हैं।

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