एक कक्षा के छात्रा के बीच दौंड़ हो रही थी । अंत में दों ही प्रतिभागी बचें थे। इनमें से एक छात्र कक्षा के अधिकतर लड़को का पंसदीदा था। और दूसरा कक्षा में अाकर मजाक का पात्र बना करता था। दौड़ से पहलें भी बाकी के लड़के उसका मजाक बनाने लगे सबसे प्रिय छात्रा को अपनी जीत का भरोसा था। जब दौड़ शुरू हुई कक्षा के लड़के ने अपने साथी का मनोबल बढाने के लिए तालिया बजायी और उसके पक्ष में और दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरूकर दी । दौड़ खत्म होने पर दूसरा छात्र जित गया उसकी जीत की उम्मीद किसी ने न की थी । पुरस्कार देने के बाद एक शिक्षक ने पुछा दूसरे लड़के के पास इतना समर्थन था। तुम एकाग्र कैसे रह पाए? तब वह बोला मैं अपनें खिलाफ कही जा रही बातों को चुनौती की तरह लेकर जीता ।मंत्र :- चुनौती सें डरे नही जींतें।

