एक बार एक राजा ने आपनी एक तिजोरी की निलामी का राज्य का एक बड़ा व्यापारी सोनेकी पांच सौ मोहरे देकर तिजोरी खरीद ले गया अगले दिन दरबार में वह व्यापारी फिर आया और तिजोरी लौटाने की बात कही । यह सुनकर सब चैक गए कि कल तो उसने सबसे ऊंची बोली लगाकर तिजोरी खरीदी थी और वह आज उसे पैसे वापस लिए बिना लौटाने आया है।व्यापारी ने राजा से कहा की उसने साली तिजोरी का सौदा किया था। लेकिन तिजोरी कीमती जेवरो से भरी हुई है। इा पर राजा सहित सभी दरबारीहंसने लगें लगें और उसें मूर्ख कहने लगें राजा ने उसे भरी तिजोरी वापास ही वापस ले जाने काआदेष दिया कि व्यापारी ने कहा की वह किस्मत से मिले इन जेवरों को नही रख सकता क्योकि खुषी हमेषा मेहनत की कमाई से ही मिलती है।
मंत्र :- अगर सच्ची खुशी चाहतें है। तो मेहनत करे और ईमानदार रहें।


