Wednesday, 31 May 2017

व्यर्थ की व्यस्तता

             
एक पक्षी चिकित्सालय मे अधिकारी ने जायजा लेने आना था। इसलिए पूरे अस्पताल में साफ सफाई पर जोर थ। अस्पाताल के प्रबंधक खुद अधिकारी को लाने गए थे। अचानक एक कबूतर को लेकर आया जिसका पंख बहुत चांेटिल था। आस्पाताल के एक कर्मी ने उसे डाटतें हुण् क्हा अभी हम कुछ नही कर सकते है। साहब का दौरा है। तुमयहां इससे खुन से गंदा मत करों फैलाओं एक घटे बाद आना इस बात का नाराज एक अन्य कर्मी बाहर ही बैठकर कबूतर की प्राथ्मिक चिकित्सा करने लगा। तभी अधिकारी और प्रबधक आ पाहुचें । उन्होनें बाहर होते उपचार और फैला खून को देखकर माजरा पुछा ।अधिकरी चलें गए अगलें दिन प्रबधक ने दोनो कर्मी को को बुलाया अपेक्षा से विपरीत उन्होने पहले कर्मीयों का डांटा तों वह बोला मै। व्यस्त था। साहब तब उन्होने कहा अपने मूल काम को छोड़कर तुम्हारी सब व्यस्तताएं व्यर्थ है।
म्ंात्रः- जीवन में काम का महत्व देखकर उसे पूर्ण करना चाहिए

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