एक नदी के किनारे एक आदमी ध्यानमग्न होकर बैठा था। एक साधु उसे देखकर रूक गया व्यक्ति का ध्यान टूटा तो साधु ने पुछा इतनी गहरी साधना किस चीज के लिए ? वह बोला मै ऐसा पत्थर चाहता हु। जो दूसरी चीजों को स्पर्ष मात्र से सोना बना दे साधु पेड़ के किनारे पर पडें पत्थरो में एक पत्थर ऐसा है।साधु चला गया वह व्यक्ति दौड़कर पत्थरों के पास आ गया वह पत्थर उठाया जाता और दूसरा से छुआकर देखता ।वें नही बदलतें थें उसनें जल्दी जल्दी स्पर्ष कराकर पत्थर को नदी में फेकना षुरू कर दिया कुछ देर बाद उसने देखा वहा पडे पत्थरों में से एक सोेने का बन चुका था। उसे बहुत पछातावा हुआ कि जल्दबाजी में वह एक ऐसा पत्थर को नदी में फेक चुका था। जिसने इसे सोने का बनाया था। उसे बहुत पछतावा हुआ।
मंत्रः- काम में जल्दबाजी नुकसान देगी।







