Tuesday, 20 June 2017

प्रेरणा... हमारी कीमत


यह नोट मैं आपको जरूर  दूंगा लेकिन  उससे पहले मैं इसे...’ यह कहते हुए उसने उस नोट को अपने हाथ में कसकर भींचकर दिया।


एक वक्ता ने  सेमीनार में अपनी  जेब से 100 नोट निकाला और कमरे में उपस्थित 200 लोगों से पूछा,  ‘कौन  यह 100 डाॅलर  का नोट लेना चाहता है?  अपने हाथ खड़ा कर दें।’  सभी मौजूद लोगा ने हाथ उठा दिए।  वक्ता ने कहा, ‘यह नोट मैं आपको जरूर दूंगा लेकिन उससे पहले मैं इसे...’ यह कहते हूए उस नोट को अपने हाथ में कसकर  भींचकर दिया।  इससे नोट काफी तुड़.मुड़ गया। उसने फिर पूछा, अब भी किसी को नोट चाहिए? अगर  हां तो फिर से हांथ ऊपर करें। अब भी सारे हाथ ऊठ गए। ‘अच्छा’! वक्ता ने कहा,  ‘और अगर मैं  इस नोट के साथ यह करूं तो? कहते हुए उसने नोट जमीन पर पटककर उसे अपने जूते से मसल दिया। (वैसे हम भारतवासी तो कदापि न करें।)

उसने गंदा  तुड़ा  मुड़ा सा  नोट उठाया और फिर से कहा, क्या अब भी कोई इसे लेना चाहेगा’? 

‘दोस्तों,’ वक्ता ने कहा, ‘मुझे इस बात से कोई शिकायत नहीं है कि आप सब लोग अब भी इस  नोट को  लेना चाहते हैं।  आप सभी ने  आज एक बेशकीमती सबक सीखा है। इस नोट  के साथ मैंने इतना कुछ किया पर सभी इसे लेने को तैयार हैें क्योंकि इसकी कीमत कम नहीं हुई। सह अब भी 100 ड़ालर का नोट है।’
हामारी जिंदगी में कई बार गिराया, कुचला और अपमानित किया जाता है पर इससे हमारी कीमत, हमारा महत्व कम नहीं हो जाता। इसे हमेशा याद रखें।
     

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