Sunday, 13 August 2017

सूंदर पिचाई Sundar Pichai दुनिया के सबसे बड़ी कंपनी Google के सी.ई.ओ.

August 13, 2017 1

दोस्तों हमारे लिए इससे ज्यादा गर्व की बात क्या होगी। की एक भारतीय व्यक्ति को दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी गूगल ( Google ) के सी.ई.ओ. के रूप में चुना गया हो। आखिर कुछ तो बात है हम भारतीयों में जिससे दुनिया हमारी इतनी दीवानी है।  दोस्तों आज मैं बात करने जा हूँ। सूंदर पिचाई (Sundar Pichai)  की जिन्होंने तमिलनाड की गलियों से इस दुनिया के सबसे बड़ी कंपनी के सी.ई.ओ. बनने तक का सफर तय किया दोस्तों इस उचाई पर पहुंचना हर किसी के बस के बात तो नहीं है लेकिन सच्चे दिल से कुछ कर जाने की इच्छा हो न, तो इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। सुन्दर पिचाई का वास्तिव नाम सुन्दर राजन पिचाई है। उनका जन्म 12 जुलाई 1972 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में हुआ था उनके पिता का नाम रघुनाथ पिचाई और माँ का नाम लक्ष्मी पिचाई है सुन्दर के पिता रघुनाथ पिचाई एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और उन्ही से पिचाई  टेक्नोलॉजी से जुड़ने के प्रेरणा मिली  पिचाई 12 साल के थे तो उनके पिता घर में एक लैंडलाइन फ़ोन लेकर आये आज जो  दुनिया के सबसे बड़े टिक कंपनी के शीर्ष स्थान पर कार्य रत है।




उनके जीवन में यह सबसे पहला टेक्नोलॉजी से जुड़ा हुआ कोई वस्तु था सुन्दर पिचाई में एक बहुत ही विशेष गुण था वो आसानी से अपने टेलीफोन में डाइल किये गए सभी नंबर को याद कर लिया करते थे और आज भी उनसे उन नुम्बरो के बारे में पूछे जाने पर वो नंबर याद रहते है दरअसल सिर्फ फ़ोन नंबर ही नहीं उन्हें हर प्रकार के नंबर आसानी से याद रह जाते थे पढाई में तो वो अच्छे थे ही साथ ही साथ क्रिकेट के भी दीवाने थे और अपने स्कूल  के क्रिकेट टीम के  कप्तानी  भी करते  थे। सुन्दर पिचाई ने जवाहर विद्यालय में अपनी दसवीं की पढ़ाई पूरी की फिर चेन्नई के वाणावांडी स्कूल में अपनी बारहवीं की परीक्षा और फिर IIT खड़गपुर से इन्जनीरिंग  पढ़ाई की अपने लगन और मेहनत के बल पर उन्होंने हर जगह टॉप किया और IIT में उन्हें रजक पदक भी से सम्मानित किया गया। छात्रवृत्ति पाकर आगे की पढाई के लिए उन्होंने  कैलिफोर्निया के स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रवेश ले लिया और भौतिक विज्ञान में मास्टर इन साइंस की डिग्री पूरी  आखिर में वे MBA की पढाई के लिए वार्टन स्कूल यूनिवर्सिटी ऑफ़  पेन्सिवेनिया चले गए google से  जाने से  पहले सुन्दर  पिचाई Mckinsey & company और Appleid Materials में भी अपना योगदान दिया था।





पिचाई 2004 में पहली बार Google से जुड़े शुरू शुरू में उन्होंने अपनी छोटी सी टीम के  साथ Google Search स्टोर बार पर काम किया Google पर काम करते समय सुन्दर पिचाई के मन में एक आईडिया आया वो था खुद का इंटरनेट ब्रौज़र बनाने का। उस समय के Google के CEO से पिचाई ने  खुद के इंटरनेट ब्रौज़र बनाने दी बात की तो बहुत महंगा प्रोजेक्ट कहकर उन्होंने मन कर दिया लेकिन पिचाई ने हर नहीं मानी और Google के अन्य पार्टनर से बात करके उन्हें मना  लिया  2008 में सुन्दर पिचाई की   मदद से Google खुद का वेब ब्राउज़र लॉन्च किया। जिसका नाम Chrome दिया गया  .आज के समय में Google chrome दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला वेब ब्राउज़र है।




यही Google कंपनी में सुन्दर पिचाई का टर्निंग पॉइंट था उनके लगन को देखते हुए सुन्दर पिचाई को हर प्रोडक्ट के  शीर्ष स्थान प्राप्त होते  गये और देखते ही देखते पिचाई CEO की दौड़ में भी शामिल हो गए Google के CEO बनाने से पहले उनके पास Microsoft और Twitter का भी ऑफर आया लेकिन उनके लगन और मेहनत को देखते हुए Google ने  उन्हें  बहुत सारे पैसे  बोनस के रूप में देकर उन्हें रोक लिया। और आखिरकार 10 अगस्त 2015 को सुन्दर पिचाई को दुनिया का सबसे कंपनी Google का CEO बना दिया गया। इतनी बड़ी सफलता के पीछे सुन्दर पिचाई के सरल स्वभाव का बहुत बड़ा हाथ था उनके सरल स्वभाव के वजह से उन्हें हर कोई बहुत मानता था।दोस्तों अंत में मैं बस यह  कहना चाहूंगा की.....   
जब इरादा बना लिया ऊँची उड़ान का  
फिर फिजूल है कद आसमान का 

  
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Saturday, 5 August 2017

dipa karmakar biography in hindi - | लड़कियो के लिए है रोल माॅडल- दीपा करमाकर |

August 05, 2017
9 अगस्त 1993 को अगरतला में जन्मी दीपा कर्मकार आर्टिस्टिक जिमनास्ट है। वह रियो ओलंपिक में क्वालीफाई करनी वाली पहली महिला भारतीय महिला जिमनास्ट बन गई है। 52 साल बाद यह पहला मौका है। जब भारत का कोई एथलीट ओलंपिक जिमनास्टि की प्रतियोगिता में भाग लेगा। वह ग्लास्गो में 2014 काॅमनवेत्य गेम्स में कास्य पदक जीत चुकी है। ऐसा करनी वाली वह पहली भारतीय महिला जिमनास्ट है।बकौल दीपा वह ओंलपिक में मेडल जीतनेंके लिए कड़ी                                                                                    मेहनत कर रही है।




          अब तक जीत चुकी है 77 मेंडल 

दीपा ने छह वर्श की उम्र में जिमनास्टिक की षुरूआत की उनके पिता वेटलिफ्टर और कोच रहे है। 2007 में जूनियर नेषनल काॅम्पिटिषन में मेडल जीतने के बाद उन्होने पीछे मुड़कर नही देखा वह 77 मेडल जीत चुकी है वह पा्रेडूनोवा वाॅल्ट में एक्सपर्ट है। ऐसा सिर्फ दुनिया के पांच महिला जिमनास्ट कर सकती है। वह कडी मेहनत में भरोसा करती है।





         लड़कियो के लिए है रोल माॅडल  

बिष्वेष्वर नंदी 16 साल से दीपा का टेªनिग दे रहे थे। बचपन में जब दीपा उनके पास आई थी तो सबसें बड़ी चुनौती उनके  फ्लैट पैर थे दीपा को जिमनास्ट बनने में काफी परेषानी आई पर उन्होने हार नही मानी उन्होने हर बाधा को पार कर खुद को दुनिया के सामने मजबूत साबित करके दिखाया। 




        जेखिम उठाने से मिली सफलता 

पूरा देष दीपाकी उपलब्धि से गौरवान्वित है। इस बारे में दीपा कहती है। कि कुछ पाने के लिए इसान कों जोखिम लेना पड़ता है। मैने घंटों प्रैक्टिस करने के बाद यह उपलब्धि प्राप्त की है। वह कहती है।कि  बवपन में मेरी जिमनास्टि में रूचिनही थी । पर पिता जी ने मुझे इसके लिए प्रेरित किया  इसके बाद मैने ठान लिया कि जिमनास्टि के क्षेत्र में देष का नाम ऊंचा करके दिखाऊंगी।




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  दीपा करमाकर  


Wednesday, 2 August 2017

mike pence biography in hindi - | चलाते थे पहले बस अब है यूएस के नए उपराष्ट्रपति |

August 02, 2017

7जून 1959 को कोलंबस, इंडियाना में जन्में जन्में माइक पेंस यूनाइटेड स्टेट्स के नए उपराश्ट्रपति  हैं। वह  यूएस के 48वें  उपराश्ट्रपति हैं।  वह  वर्श 2013 से 9 जनवरी 2017 तक  इंडियाना के  गर्वनर  रह चुके हैं। वह  इनसोवर काॅलेज से ग्रेजुएषन कर चुके हैं। साथ ही उन्होने इंडियाना  यूनिवर्सिटी राॅबर्ट एच, मैकिन्से स्कूल आॅफ लाॅ से कानून की  डिग्री प्राप्त की है। वह  वर्श  1994 से 1999 जक रेडियो और टीवी षो के होस्ट रह चुके हैं।  वह यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस में वर्श 2000 में चुने गए।



 
         राजनीति से लोगों का जीवन संवारेेंगे  


पेंस अटाॅनी  के रूप  में प्रेक्टिस  कर चुके हैं।  वह 2009    ़ से 2011  तक हाउस रिब्लिकन काॅन्फ्रेंस के चेयरमैन भी रह चुके हैं। वह कहते हैं कि  वह राजनीति से लोगों का जीवन संवार सकते हैं। उन्होने जाॅन एफ कैनेडी और मार्टिन  लूथर किंग जूनियर से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा।





 
                                                                         पेंस के दादारी बस चलाते थे  

पेंस इंडियाना पाॅलिसी रिव्यू के प्रेसीडेंट भी रह चुके हैं। उनका जन्म एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था।  वह  परिवार के बच्चों  में छठे नंबर पर थे। उनके माता.पिता गैस स्टेषन पर काम करते थे। उनके  दादाजी बस चालक थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद पेंस ने  कई तरह  के काम किए।  उन्होंने एडमिषन  काउंसलर के रूप में भी काम किया।

           

             किसी काम को छोटा नहीं समझें  


यूनाईटेड स्टेट के  नए  राश्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप  ने पेंस को  सŸाा ट्रांस्फर टीम के प्रमुख नियुक्त किया था। पेंस ने रातनिति में कई नए प्रयोग किए। वह कहते हैं कि अगर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको कभी भी किसी काम को छोटा नहीं समझना  चाहिए। उनका  मानना है कि  कई तरह के  कार्यों का अनुभव जीवन के लिए अच्छा है।




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माइक पेंस



     

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